Taxation on Gold

गोल्ड यानी सोना के कई रूप हैं जिसमें हर कोई निवेश कर सकता है। यह भारतीयों के लिए संपत्ति की सबसे आकर्षक श्रेणी है।

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फिजिकल गोल्ड के अलावा डिजिटल गोल्ड और पेपर गोल्ड की भी आजकल काफी मांग है। ऐसे में निवेशक को सोने में निवेश से जुड़ी Tax Liabilities के बारे में पता होना चाहिए।

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आयकर अधिनियम के अनुसार सोने को एक पूंजीगत संपत्ति माना जाता है। जब कोई व्यक्ति भौतिक रूप में सोना बेचता है जैसे सोने के आभूषण, सोने के बिस्कुट, सोने के सिक्के आदि

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तो उस पर Capital Gain Tax लागू होगा और पूंजीगत लाभ होने वाले फायदे के प्रकार के आधार पर कर के दायरे में आते हैं, चाहे दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ हो या अल्पकालिक पूंजीगत लाभ।

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यदि आप बिक्री की तारीख से पहले 36 महीने से अधिक समय तक सोना रखते हैं, तो यह एक दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ है।

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लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ के मूल्य को प्राप्त करने के लिए आप फिजिकल गोल्‍ड की खरीदी की लागत पर इंडेक्सेशन लाभ ले सकते हैं।

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इस तरह के लाभ पर 20 प्रतिशत और 4 प्रतिशत का उपकर लगाया जाता है। इसलिए, कुल कर देनदारी 20.08 प्रतिशत होगी।

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हालांकि, अगर आपने सोने को छोटी अवधि के भीतर, यानी खरीद की तारीख से 36 महीने की समाप्ति से पहले बेच दिया है, 

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तो अपनी सकल कुल आय में इस तरह के अल्पकालिक पूंजीगत लाभ को शामिल करें और नियमित कर स्लैब के अनुसार कुल कर योग्य आय पर कर की गणना करें।

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