अजय देवगन काबिल अभिनेता हैं। निर्देशक बनने का सपना उन्होंने हीरो बनने से पहले देखा।

फिल्म ‘रनवे 34 (Runway 34)’ उनकी तीसरी कोशिश है फिल्म निर्देशक बनने की।

कैमरे की प्लेसिंग करने के भी उस्ताद दिखते हैं। दूसरे अभिनेताओं से कलाकारी भी अजय बढ़िया कराते हैं।

फिल्म ‘रनवे 34 (Runway 34)’ की कहानी भी वही है। एक पायलट की जिद और मौसम का कहर। दोनों के बीच फंसे यात्रियों की भावुक कहानियां

और, साथ में एक को पायलट, जिसका नाम जानबूझकर ऐसा रखा गया कि उसकी फिरकी ली जा सके।

अभिनय के लिहाज से फिल्म का फॉर्मूला बिल्कुल सेट है। अजय देवगन को हैरान, परेशान और हलकान दिखना है।

इसमें वह मास्टर हैं। चेहरे पर दर्द दिखाना हो तो उसमें भी तमाम दूसरे अभिनेताओँ से हमेशा से इक्कीस रहे हों।

फिल्म जब तक हवाई जहाज में रहती है, उड़ती रहती है। फिल्म धड़ाम होती है, जमीन पर आने के बाद।

अमिताभ बच्चन के अभिनय में अब ताजगी घटती जा रही है। अपनी आवाज पर जरूरत से ज्यादा जोर देने से भी उनका अभिनय आकर्षण अपनी चमक खो रहा है।

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